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हरी ॐ तत्सत

श्री गंगा दशहरा :-ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन श्री गंगा दशहरा मनाया जाता है इस दिन माँ गंगा मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए धरती पर आंई थीं तिथि विशेष के कारन इसी दिन को दशहरा के नाम से जाना गया शास्त्र अनुसार यदि इस दिन सोमवार दशमी तिथि में हस्ता नक्षत्र का संयोग बन जाए तो ये दिन मनुष्य को दस पापों से मुक्त करने वाला हो जाता है (तीन कायिक+चार वाचिक+तीन मानसिक) ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को संवत्सर का मुख भी माना जाता है अतः इस दिन का महत्त्व और भी बढ़ जाता है !! माँ गंगा का अवतरण सूर्य वंश के राजा सागर के कुल के द्वारा हुआ था क्यूंकि कथानुसार राजा सगर के ६०००० पुत्र थे जो ऋषि कपिल मुनि के श्राप से भस्म हो गये थे सगर पुत्र अंशुमन के प्रार्थना से प्रसन्न होकर ऋषि ने उनकी मुक्ति के लिए उपाय स्वरूप कहा की यदि कोई आपका वंशज माँ गंगा को धरती पर लाकर उनके जल से इस भस्म का अभिषेक करें तो यह शाप मुक्त हो सकते हैं और यही आपका परम कर्तव्य है ...ऋषि हर कार्य का आधार जन कल्याण मान कर ही श्राप या वरदान देते थे कलियुग में पाप नाश एवं पित्री दोष से मुक्ति का सरल सुगम साधन बनाने के लिए ही महर्षि कपिल मुनि ने यह सारी रचना की और आज उन्ही राजा सगर वंशीय राजा भागीरथ की कृपा से हम इस घोर कलियुग में भी माँ गंगा के श्नान से एवं इनके तट पर अपने पितरों की संतुष्टि के लिए श्राद्ध-तर्पण कर जीवन सफल करते हैं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पित्री दोष को देखा जाता है एवं कल्प शास्त्र की आज्ञा से इस दोष की मुक्ति के लिए जो सद्गृहस्थ हर अमावस या वर्ष में कम से कम एक बार भी गंगा श्नान करके वहां अपने पितरों के लिए अन्न-जल दान करता है उसके समस्त पितृ प्रसन्न होकर अपने कुल के व्यक्तियों को सम्पूर्ण सुख-शान्ति प्रदान करते हैं !! इस दिन विशेष पर सर्व प्रथम गंगा शनान करें

  ‘ॐ नमः शिवाय नारायन्ये द्शहराए गंगायै नमः”  मन्त्र से माँ गंगा का षोडशोपचार पूजन करें ! नमः के स्थान पर स्वाहा लगा कर हवन करें तत्पश्चात “ॐ नमो भगवती ऐम ह्रीं श्रीं हिली-हिली मिली-मिली गंगे माँ पावय-पावय स्वाहा” मन्त्र से पांच अंजलि जल माँ गंगा जी को पांच-पांच अंजली जल उत्पत्ति स्थल हिमालय राज को एवं पृथ्वी पर लाने वाले राजा भागीरथ को प्रदान करें एवं दश ब्राह्मणों को दश-दश पुष्प,फल,धुप,दीपक,नैवेद्य,लोंग,इलाइची,दक्षिणा,सुपारी एवं यज्ञोपवीत साथ में सोलह-सोलह मुठी जों एवं तिल भी दान करें फिर दश गोते लगा कर अपने तथा अपने पितरों के पापों के लिए क्षमा मांगें यह उपाय नहीं है शास्त्र अनुसार अवश्य करनीय कर्तव्य करम है अतः हर सचेत सद गृहस्थी इसी प्रकार हर वर्ष पूजा संपन्न करनी चाहिए !! इस वर्ष 28 मई दिन वीरवार को दोपहर 11;26 के बाद हस्त नक्षत्र होने के कारन गंगा श्नान एवं उक्त रीती से पूजा करने का विशेष महत्त्व रहेगा !! हरी ॐ तत्सत !!

वैदिक महर्षि डॉ बलविन्द्र अग्रवाल